By - Gurumantra Civil Class
At - 2025-12-20 17:56:29
BPSC 70th Mock interview, Day -6
लोकतंत्र में आलोचना की सीमा : सरकार बनाम सेना
कुछ बयानों में कथित “ऑपरेशन सिन्दूर” को लेकर भारतीय सेना पर नकारात्मक टिप्पणियाँ की गईं। समाज में एक मत यह उभरा कि सरकार की आलोचना लोकतांत्रिक अधिकार है, पर सेना का अपमान स्वीकार्य नहीं।
🔶 संभावित BPSC इंटरव्यू प्रश्न एवं मॉडल उत्तर
प्रश्न 1.इस पूरे विवाद का मूल मुद्दा क्या है?
मॉडल उत्तर:
मूल मुद्दा यह है कि लोकतंत्र में सरकारी नीतियों/निर्णयों की आलोचना और सेनाओं की संस्थागत गरिमा—इन दोनों के बीच स्पष्ट रेखा बनाए रखी जाए। सरकार की आलोचना वैध है, लेकिन सेना पर अपमानजनक टिप्पणियाँ संस्थागत मनोबल को प्रभावित कर सकती हैं।
प्रश्न 2.क्या सेना की आलोचना करना लोकतंत्र के विरुद्ध है?
मॉडल उत्तर:
नहीं। लोकतंत्र में नीतिगत निर्णयों पर प्रश्न उठाए जा सकते हैं।
लेकिन ऑपरेशनल विवरण, पेशेवर आचरण और बलिदान को लक्ष्य बनाकर सामान्यीकृत आरोप लगाना उचित नहीं माना जाता। आलोचना का लक्ष्य नीति-निर्माता होने चाहिए, न कि संस्थान।
प्रश्न 3. (ट्रैप) -क्या आप मानते हैं कि ऐसे बयानों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए?
सुरक्षित मॉडल उत्तर:
कार्रवाई का दायरा कानून और संविधान तय करते हैं।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, पर मर्यादा, तथ्यात्मकता और राष्ट्रीय हित के साथ। जहाँ बयान दुर्भावना/भ्रामक हों, वहाँ विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
प्रश्न 4. सेना को राजनीति से अलग रखने का सिद्धांत क्यों महत्वपूर्ण है?
मॉडल उत्तर:
सेना एक गैर-राजनीतिक, पेशेवर संस्था है।
इसे राजनीति से अलग रखने से नागरिक-सैन्य संतुलन, पेशेवर निष्पक्षता और लोकतांत्रिक नियंत्रण सुरक्षित रहता है।
प्रश्न 5. ऐसे बयानों का सैनिकों के मनोबल पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
मॉडल उत्तर:
लगातार नकारात्मक सामान्यीकरण से मनोबल, परिवारों का विश्वास और सार्वजनिक सम्मान प्रभावित हो सकता है। इसलिए सार्वजनिक विमर्श में भाषा का चयन जिम्मेदारी से होना चाहिए।
प्रश्न 6. सरकार की आलोचना और सेना के सम्मान—दोनों कैसे साथ-साथ बनाए रखें?
हाई-स्कोर उत्तर:
नीति-केंद्रित आलोचना, तथ्य-आधारित प्रश्न और संस्थागत सम्मान—इन तीनों का संतुलन आवश्यक है।
नीतियाँ बदलती हैं; संस्थान राष्ट्र के स्थायी स्तंभ होते हैं।
प्रश्न 7. (संवैधानिक एंगल)
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर इसकी सीमा क्या है?
मॉडल उत्तर:
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मौलिक अधिकार है, पर यह उचित प्रतिबंधों के अधीन है—जैसे सार्वजनिक व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और शालीनता। संतुलन ही संवैधानिक आदर्श है।
प्रश्न 8. (प्रशासनिक दृष्टि)
यदि आप जिला प्रशासन में हों और तनावपूर्ण बयानबाज़ी से शांति प्रभावित हो, तो क्या करेंगे?
मॉडल उत्तर:
मैं संवाद, तथ्य-आधारित संचार, और कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता दूँगा; भ्रामक सूचनाओं का त्वरित खंडन, और विधिसम्मत कार्रवाई—ताकि सामाजिक सौहार्द बना रहे।
प्रश्न 9. (एथिक्स)
एक नागरिक और लोकसेवक के रूप में आपकी व्यक्तिगत कसौटी क्या होगी?
मॉडल उत्तर:
मेरी कसौटी होगी—संविधान-निष्ठा, संस्थागत सम्मान और विवेकपूर्ण अभिव्यक्ति।
मैं नीति पर कठोर प्रश्न पूछूँगा, पर संस्थानों के प्रति सम्मान बनाए रखूँगा।
प्रश्न 10. (क्लोज़िंग)
एक वाक्य में अपना निष्कर्ष बताइए।
प्रभावी उत्तर:
लोकतंत्र में सरकार की आलोचना वैध है, लेकिन सेनाओं की गरिमा और गैर-राजनीतिक प्रकृति का सम्मान हर परिस्थिति में अनिवार्य है।
🟡 इंटरव्यू के लिए “Golden Phrases”
Policy-centric criticism
Institutional respect
Civil–military balance
Constitutional morality
Responsible free speech
🔴 आम TRAP से बचाव
❌ किसी नेता/संस्था का नाम लेकर पक्ष लेना
❌ “देशद्रोह/देशभक्ति” जैसे निर्णायक लेबल
❌ भावनात्मक/आरोपात्मक भाषा
सुरक्षित लाइन:
“मुद्दा व्यक्ति नहीं, नीति और संस्थागत मर्यादा का है।”
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BPSC 70th Interview Tips
1️⃣ साक्षात्कार परीक्षा क्या होती है?
साक्षात्कार परीक्षा वह चरण है जिसमें अभ्यर्थी के व्यक्तित्व, सोचने की क्षमता, निर्णय-क्षमता, नैतिक दृष्टिकोण, तथा प्रशासनिक उपयुक्तता का प्रत्यक्ष मूल्यांकन किया जाता है।
यह कोई “ज्ञान जाँच” की परीक्षा नहीं होती, बल्कि यह देखा जाता है कि अभ्यर्थी लोकसेवक बनने के योग्य है या नहीं।
👉 इसे अक्सर Personality Test भी कहा जाता है।
2️⃣ साक्षात्कार परीक्षा का महत्व-
(i) लिखित परीक्षा की सीमाओं को पूरा करना -
लिखित परीक्षा में केवल स्मरण शक्ति, उत्तर लेखन कौशल की जाँच होती है, जबकि साक्षात्कार में व्यवहार, सोच, संतुलन, आत्मविश्वास को परखा जाता है।
(ii) प्रशासनिक क्षमता का आकलन -
लोकसेवक को दबाव में निर्णय लेना होता है। जनता से संवाद करना होता है, निष्पक्ष रहना होता है। साक्षात्कार में इन्हीं क्षमताओं को परखा जाता है।
(iii) व्यक्तित्व की समग्र जाँच-
साक्षात्कार यह देखता है कि अभ्यर्थी में ईमानदारी, नैतिकता, नेतृत्व, संवेदनशीलता जैसे गुण हैं या नहीं।
साक्षात्कार परीक्षा का उद्देश्य -
🎯 मुख्य उद्देश्य:-
यह जानना कि अभ्यर्थी सिर्फ विद्वान ही नहीं, बल्कि एक अच्छे प्रशासक और जिम्मेदार लोकसेवक बनने योग्य है या नहीं।
उद्देश्य को बिंदुओं में समझें:
1. व्यक्तित्व का मूल्यांकन
– आत्मविश्वास, संतुलन, विनम्रता
2. निर्णय-क्षमता की जाँच
– नैतिक दुविधा में क्या सोचता है
3. सोच की स्पष्टता
– प्रश्न को कैसे समझता और उत्तर देता है
4. जनसेवा दृष्टिकोण
– सत्ता नहीं, सेवा का भाव
वर्तमान घटनाओं की समझ
– करंट अफेयर्स पर संतुलित दृष्टि
4️⃣ साक्षात्कार परीक्षा क्या नहीं होती -
❌ रटने की क्षमता की नहीं
❌ ट्रिक सवालों से फँसाने की नहीं
❌ अभ्यर्थी को नीचा दिखाने की नहीं
बल्कि यह:
✔ संवाद आधारित
✔ मित्रवत लेकिन विश्लेषणात्मक
✔ व्यवहारिक परीक्षा होती है
5️⃣ इंटरव्यू बोर्ड क्या देखता है?
इंटरव्यू बोर्ड यह देखता है कि अभ्यर्थी: -
✔ दबाव में शांत रहता है या नहीं
✔ असहमति को सम्मान से रख सकता है या नहीं
✔ सत्ता को जिम्मेदारी समझता है या नहीं
✔ समाज के प्रति संवेदनशील है या नहीं
6️⃣ उत्तर देने का आदर्श ढाँचा -
✍️ मॉडल उत्तर (30–40 सेकंड):
साक्षात्कार परीक्षा का उद्देश्य अभ्यर्थी के व्यक्तित्व, सोच और प्रशासनिक क्षमता का मूल्यांकन करना है।
यह देखा जाता है कि वह केवल ज्ञानवान ही नहीं, बल्कि नैतिक, संतुलित और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्ध लोकसेवक बन सकता है या नहीं।
इसलिए इसका महत्व लिखित परीक्षा से अलग लेकिन उतना ही आवश्यक है।
7️⃣ BPSC दृष्टिकोण से -
📌 BPSC इंटरव्यू में चयन ज्ञान से नहीं, बल्कि “Balance + Behaviour + Bureaucratic Aptitude” से होता है।
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