BPSC AEDO & Bihar SI Full Test Discussion Start from 3rd November 2025 . Total Set Discussion- 50+50. BPSC 72nd, UPPSC 2026, MPPSC 2026, Mains Cum Pt Batch Start from 10 November 2025

BPSC MOCK Interview, Day-7

By - Gurumantra Civil Class

At - 2025-12-20 22:38:19

पृष्ठभूमि (Background)

अरावली पर्वतमाला भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जिसका भूगर्भीय इतिहास करोड़ों वर्षों पुराना माना जाता है। यह पर्वतमाला गुजरात से लेकर राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक फैली हुई है तथा उत्तर-पश्चिम भारत के पर्यावरणीय संतुलन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

प्राचीन काल में अरावली पर्वत अत्यंत ऊँचे और सघन वनों से आच्छादित थे, किंतु दीर्घकालीन अपरदन (Erosion) और प्राकृतिक क्षरण के कारण इनकी ऊँचाई धीरे-धीरे कम होती चली गई। इसके बावजूद, अरावली आज भी थार मरुस्थल के पूर्व की ओर विस्तार को रोकने, भूजल रिचार्ज, स्थानीय जलवायु संतुलन तथा जैव विविधता संरक्षण में अहम योगदान देती है।

हाल के दशकों में तीव्र शहरीकरण, औद्योगीकरण, अवैध खनन, रियल एस्टेट विस्तार तथा प्रशासनिक निगरानी की कमी के कारण अरावली पर्वतमाला पर गंभीर दबाव बढ़ा है। इसके परिणामस्वरूप वन क्षेत्र सिकुड़ रहा है, भूजल स्तर गिर रहा है और दिल्ली–एनसीआर सहित आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण, तापमान वृद्धि और मरुस्थलीकरण का खतरा बढ़ता जा रहा है।

यह स्थिति अरावली को केवल एक भौगोलिक संरचना के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पर्यावरणीय सुरक्षा और सतत विकास के संदर्भ में एक गंभीर प्रशासनिक एवं नीतिगत चुनौती के रूप में प्रस्तुत करती है। अतः अरावली का संरक्षण पर्यावरण बनाम विकास की बहस नहीं, बल्कि संतुलित विकास और भावी पीढ़ियों के हितों से जुड़ा विषय है।

✨ इंटरव्यू में उपयोगी क्लोजिंग लाइन

“अरावली का संकट प्रकृति का नहीं, बल्कि मानव-निर्मित नीति और क्रियान्वयन का संकट है।”

 

प्रश्न 1. अरावली पर्वतमाला को भारत की जीवन रेखा क्यों कहा जाता है?

मॉडल उत्तर -

  • अरावली पर्वतमाला केवल एक भू-आकृतिक संरचना नहीं है, बल्कि यह उत्तर-पश्चिम भारत की पारिस्थितिक सुरक्षा ढाल है।
  • यह थार मरुस्थल को पूर्व की ओर फैलने से रोकती है।
  • यह भूजल रिचार्ज ज़ोन के रूप में कार्य करती है।
  • दिल्ली–एनसीआर की वायु गुणवत्ता और तापमान संतुलन में इसकी अहम भूमिका है।
  • कई नदियों एवं मौसमी जलधाराओं का उद्गम क्षेत्र है।

👉 इसलिए अरावली को “जीवन रेखा” कहना वैज्ञानिक और व्यावहारिक—दोनों दृष्टियों से उचित है।

प्रश्न 2. अरावली पर्वतमाला के क्षरण के प्रमुख मानवजनित कारण क्या हैं?

मॉडल उत्तर - अरावली के क्षरण के पीछे मुख्यतः मानव गतिविधियाँ जिम्मेदार हैं—

  1. अवैध एवं अनियंत्रित खनन
  2. तेज़ शहरीकरण और रियल एस्टेट विस्तार
  3. औद्योगिक परियोजनाएँ
  4. वन भूमि पर अतिक्रमण
  5. कानूनों का कमजोर क्रियान्वयन

👉 यह एक विकास बनाम पर्यावरण का नहीं, बल्कि असंतुलित विकास का प्रश्न है।

प्रश्न 3. क्या विकास के नाम पर अरावली की कटाई को सही ठहराया जा सकता है?

मॉडल उत्तर -  नहीं।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48A और 51A(g) राज्य एवं नागरिक—दोनों पर पर्यावरण संरक्षण का दायित्व डालते हैं।

विकास आवश्यक है, लेकिन वह सतत (Sustainable) होना चाहिए। पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) के बाद ही होना चाहिए

👉 अल्पकालिक आर्थिक लाभ के लिए दीर्घकालिक पर्यावरणीय क्षति उचित नहीं ठहराई जा सकती।

प्रश्न 4. अरावली के क्षरण का दिल्ली–एनसीआर पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?

मॉडल उत्तर -

अरावली के क्षरण से दिल्ली–एनसीआर में—

  • वायु प्रदूषण बढ़ा है
  • हीट वेव की तीव्रता बढ़ी है
  • भूजल स्तर में तेज गिरावट आई है
  • धूल भरी आंधियाँ और मरुस्थलीकरण का खतरा बढ़ा है

👉 अरावली का संरक्षण सीधे तौर पर महानगरों के जीवन-स्तर से जुड़ा हुआ है।

प्रश्न 5. सरकार को अरावली संरक्षण के लिए क्या कदम उठाने चाहिए?

मॉडल उत्तर -

सरकार को बहु-स्तरीय रणनीति अपनानी चाहिए—

  • अवैध खनन पर ज़ीरो टॉलरेंस नीति
  • री-फॉरेस्टेशन और नेटिव प्रजातियों का रोपण
  • अरावली क्षेत्र को इको-सेंसिटिव ज़ोन घोषित करना
  • सख्त EIA और रियल-टाइम मॉनिटरिंग
  • स्थानीय समुदाय की सहभागिता

👉 संरक्षण केवल कानून से नहीं, जन-भागीदारी से संभव है।

प्रश्न 6. यदि आप ज़िलाधिकारी हों और आपके ज़िले में अरावली क्षेत्र में अवैध खनन हो रहा हो, तो आपकी प्राथमिक कार्ययोजना क्या होगी?

मॉडल उत्तर -

  • मेरी प्राथमिकता होगी—
  • तत्काल खनन गतिविधियों पर रोक
  • राजस्व, वन और पुलिस विभाग की संयुक्त कार्रवाई
  • उपग्रह व ड्रोन आधारित निगरानी
  • दोषियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई
  • दीर्घकालीन पुनर्स्थापन योजना

👉 प्रशासन की भूमिका केवल आदेश देना नहीं, परिणाम सुनिश्चित करना है।

 

प्रश्न 7. अरावली संरक्षण से बिहार जैसे राज्य को क्या अप्रत्यक्ष लाभ है?

मॉडल उत्तर -

यद्यपि अरावली बिहार में नहीं है, फिर भी—

यह राष्ट्रीय जलवायु संतुलन को प्रभावित करती है

मानसून पैटर्न और वायु प्रवाह पर असर डालती है

पर्यावरणीय संकटों का प्रभाव राज्य सीमाओं से परे होता है

👉 इसलिए पर्यावरण संरक्षण एक राष्ट्रीय दायित्व है, न कि केवल क्षेत्रीय मुद्दा।

निष्कर्ष (इंटरव्यू क्लोजिंग लाइन)

“अरावली का संरक्षण पर्यावरण बनाम विकास की बहस नहीं, बल्कि संतुलित विकास और पीढ़ीगत न्याय का प्रश्न है।”

 

2-मिनट का रेडी-टू-स्पीक उत्तर

प्रश्न: अरावली पर्वतमाला के क्षरण पर आप क्या कहना चाहेंगे?

उत्तर (बोलने योग्य):

“सर, अरावली पर्वतमाला भारत की सबसे प्राचीन भू-आकृतिक संरचनाओं में से एक है और यह उत्तर-पश्चिम भारत के पर्यावरणीय संतुलन की रीढ़ है।

यह थार मरुस्थल के प्रसार को रोकने, भूजल रिचार्ज, जलवायु संतुलन और जैव विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

आज इसका सबसे बड़ा संकट अवैध खनन, अनियंत्रित शहरीकरण और कमजोर क्रियान्वयन से उत्पन्न हो रहा है।

इसके परिणामस्वरूप दिल्ली–एनसीआर में भूजल स्तर गिर रहा है, वायु प्रदूषण और तापमान बढ़ रहा है तथा मरुस्थलीकरण का खतरा उत्पन्न हो रहा है।

मेरा मानना है कि विकास आवश्यक है, लेकिन वह सतत होना चाहिए। सरकार को सख्त प्रवर्तन, इको-सेंसिटिव ज़ोन, पुनर्वनीकरण और स्थानीय समुदाय की भागीदारी के माध्यम से अरावली के संरक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिए।

अरावली का संरक्षण केवल पर्यावरण का प्रश्न नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के जीवन-अधिकार से जुड़ा विषय है।”

👉 यहीं रुकें। ज़्यादा भावुक या आक्रामक न हों।

 

BPSC इंटरव्यू के ट्रैप प्रश्न (बहुत महत्वपूर्ण)

🔴 ट्रैप प्रश्न 1

“अरावली की कटाई के लिए क्या सरकार पूरी तरह दोषी है?”

सेफ उत्तर:

“सर, यह केवल सरकार या केवल निजी क्षेत्र का विषय नहीं है। यह एक साझा जिम्मेदारी का प्रश्न है, जहाँ प्रशासनिक निगरानी, निजी हित और सामाजिक भागीदारी—तीनों की भूमिका है।”

✔️ न सरकार पर सीधा आरोप

✔️ न सिस्टम को बचाने की कोशिश

🔴 ट्रैप प्रश्न 2

“अगर अरावली बचानी है तो क्या सभी विकास परियोजनाएँ रोक देनी चाहिए?”

सेफ उत्तर:

“नहीं सर, विकास रोकना समाधान नहीं है। समाधान है—संतुलित और पर्यावरण-अनुकूल विकास, जहाँ आवश्यक परियोजनाएँ सख्त पर्यावरणीय मानकों के साथ आगे बढ़ें।”

🔴 ट्रैप प्रश्न 3

“क्या यह मुद्दा केवल दिल्ली–हरियाणा तक सीमित नहीं है?”

सेफ उत्तर:

“सर, पर्यावरणीय प्रणालियाँ प्रशासनिक सीमाओं में बंधी नहीं होतीं। अरावली का क्षरण राष्ट्रीय जलवायु, मानसून पैटर्न और पर्यावरणीय सुरक्षा को प्रभावित करता है।”

 

3️⃣ प्रशासनिक दृष्टि से सेफ उत्तर रणनीति

(इंटरव्यू बोर्ड को यही चाहिए)

हमेशा यह ढांचा अपनाएँ:

👉 समस्या → कारण → प्रभाव → समाधान → संतुलन

❌ भावनात्मक भाषण नहीं

❌ राजनीतिक आरोप नहीं

✅ संवैधानिक, प्रशासनिक और व्यावहारिक भाषा

4️⃣ बिहार कनेक्ट (एक लाइन जो इंप्रेस करेगी)

“सर, भले ही अरावली बिहार में न हो, लेकिन पर्यावरणीय असंतुलन का प्रभाव बिहार जैसे कृषि-प्रधान राज्यों पर भी वर्षा और तापमान के माध्यम से पड़ता है।”

5️⃣ क्लोजिंग वन-लाइन (अगर मौका मिले)

“अरावली को बचाना पर्यावरण प्रेम नहीं, बल्कि दीर्घकालिक नीति-निर्माण की आवश्यकता है।”

 

अरावली पर 5 सबसे कठिन इंटरव्यू प्रश्न (High-Pressure)

1. “अगर अरावली इतनी महत्वपूर्ण है, तो दशकों से इसे क्यों नहीं बचाया जा सका?”

मॉडल उत्तर:

“सर, मुख्य कारण नीति की कमी नहीं, बल्कि क्रियान्वयन का अंतर, विभागीय समन्वय की कमी और स्थानीय स्तर पर आर्थिक प्रलोभन रहे हैं। अब टेक्नोलॉजी-आधारित मॉनिटरिंग और जवाबदेही से इसे सुधारा जा सकता है।”

2. “खनन से स्थानीय रोज़गार मिलता है—तो उसे रोकना क्या सामाजिक अन्याय नहीं?”

मॉडल उत्तर:

“सर, अल्पकालिक रोज़गार बनाम दीर्घकालिक आजीविका का प्रश्न है। ग्रीन जॉब्स, इको-टूरिज़्म, वनीकरण और कौशल-अपग्रेड से रोजगार भी मिलेगा और पर्यावरण भी बचेगा।”

3. “क्या अदालतों के आदेश भी अरावली को नहीं बचा पाए?”

मॉडल उत्तर:

“सर, न्यायिक निर्देश दिशा देते हैं, पर स्थायी समाधान प्रशासनिक क्षमता, स्थानीय अनुपालन और सतत निगरानी से ही आता है।”

4. “अगर आप विकास परियोजना रोकते हैं तो निवेशक राज्य छोड़ देंगे—क्या करेंगे?”

मॉडल उत्तर:

“सर, निवेशक स्पष्ट नियम और स्थिर नीति चाहते हैं। सख्त लेकिन पारदर्शी EIA, समयबद्ध मंज़ूरी और पर्यावरण-अनुकूल डिज़ाइन से निवेश और संरक्षण—दोनों संभव हैं।”

5. “यह मुद्दा राजनीतिक है—आप कैसे निष्पक्ष रहेंगे?”

मॉडल उत्तर:

“सर, एक प्रशासक के रूप में मेरा आधार कानून, डेटा और जनहित होगा—न कि राजनीतिक विचार।”

 

 DM/SDM रोल-प्ले (Most Scoring Section)

स्थिति:

आप SDM हैं। अरावली क्षेत्र में अवैध खनन + स्थानीय दबाव।

आपकी कार्ययोजना (Step-wise):

तत्काल (0–7 दिन):

अवैध खनन पर स्टॉप-वर्क ऑर्डर

संयुक्त छापेमारी (राजस्व-वन-पुलिस)

सीज़र और FIR

मध्यम अवधि (1–3 माह):

4. ड्रोन/सैटेलाइट निगरानी

5. सीमांकन और इको-सेंसिटिव ज़ोन टैगिंग

6. वैध विकल्पों पर कौशल प्रशिक्षण

दीर्घकाल (6–24 माह):

7. री-फॉरेस्टेशन (नेटिव प्रजातियाँ)

8. कम्युनिटी पार्टनरशिप

9. पब्लिक डैशबोर्ड से ट्रांसपेरेंसी

👉 की लाइन:

“प्रवर्तन + विकल्प + सहभागिता—तीनों साथ।”

C️. 30-सेकंड की क्रिस्प क्लोज़िंग (Board Impression)

“सर, अरावली का संरक्षण किसी एक क्षेत्र का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पर्यावरणीय सुरक्षा का प्रश्न है। समाधान टकराव में नहीं, बल्कि संतुलित नीति, सख्त प्रवर्तन और जन-भागीदारी में है।”

🧠 इंटरव्यू माइंड-सेट (याद रखें)

❌ आरोप नहीं

❌ भावुकता नहीं

✅ डेटा + संविधान + प्रशासन

✅ समाधान-उन्मुख भाषा

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BPSC 70th Interview Tips

 

1️⃣ साक्षात्कार परीक्षा क्या होती है?

साक्षात्कार परीक्षा वह चरण है जिसमें अभ्यर्थी के व्यक्तित्व, सोचने की क्षमता, निर्णय-क्षमता, नैतिक दृष्टिकोण, तथा प्रशासनिक उपयुक्तता का प्रत्यक्ष मूल्यांकन किया जाता है।

यह कोई “ज्ञान जाँच” की परीक्षा नहीं होती, बल्कि यह देखा जाता है कि अभ्यर्थी लोकसेवक बनने के योग्य है या नहीं।

👉 इसे अक्सर Personality Test भी कहा जाता है।

 

2️⃣ साक्षात्कार परीक्षा का महत्व- 

 (i) लिखित परीक्षा की सीमाओं को पूरा करना -

लिखित परीक्षा में केवल स्मरण शक्ति, उत्तर लेखन कौशल की जाँच होती है, जबकि साक्षात्कार में व्यवहार, सोच, संतुलन, आत्मविश्वास को परखा जाता है।

 (ii) प्रशासनिक क्षमता का आकलन - 

लोकसेवक को दबाव में निर्णय लेना होता है। जनता से संवाद करना होता है, निष्पक्ष रहना होता है। साक्षात्कार में इन्हीं क्षमताओं को परखा जाता है।

 (iii) व्यक्तित्व की समग्र जाँच- 

साक्षात्कार यह देखता है कि अभ्यर्थी में ईमानदारी, नैतिकता, नेतृत्व, संवेदनशीलता जैसे गुण हैं या नहीं।

 साक्षात्कार परीक्षा का उद्देश्य - 

🎯 मुख्य उद्देश्य:- 

यह जानना कि अभ्यर्थी सिर्फ विद्वान ही नहीं, बल्कि एक अच्छे प्रशासक और जिम्मेदार लोकसेवक बनने योग्य है या नहीं।

 

 उद्देश्य को बिंदुओं में समझें:

1. व्यक्तित्व का मूल्यांकन

– आत्मविश्वास, संतुलन, विनम्रता

2. निर्णय-क्षमता की जाँच

– नैतिक दुविधा में क्या सोचता है

3. सोच की स्पष्टता

– प्रश्न को कैसे समझता और उत्तर देता है

4. जनसेवा दृष्टिकोण

– सत्ता नहीं, सेवा का भाव

वर्तमान घटनाओं की समझ

– करंट अफेयर्स पर संतुलित दृष्टि

4️⃣ साक्षात्कार परीक्षा क्या नहीं होती - 

❌ रटने की क्षमता की नहीं

❌ ट्रिक सवालों से फँसाने की नहीं

❌ अभ्यर्थी को नीचा दिखाने की नहीं

बल्कि यह:

✔ संवाद आधारित

✔ मित्रवत लेकिन विश्लेषणात्मक

✔ व्यवहारिक परीक्षा होती है

 

5️⃣ इंटरव्यू बोर्ड क्या देखता है?

इंटरव्यू बोर्ड यह देखता है कि अभ्यर्थी: - 

✔ दबाव में शांत रहता है या नहीं

✔ असहमति को सम्मान से रख सकता है या नहीं

✔ सत्ता को जिम्मेदारी समझता है या नहीं

✔ समाज के प्रति संवेदनशील है या नहीं

 

6️⃣ उत्तर देने का आदर्श ढाँचा - 

✍️ मॉडल उत्तर (30–40 सेकंड):

साक्षात्कार परीक्षा का उद्देश्य अभ्यर्थी के व्यक्तित्व, सोच और प्रशासनिक क्षमता का मूल्यांकन करना है।

यह देखा जाता है कि वह केवल ज्ञानवान ही नहीं, बल्कि नैतिक, संतुलित और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्ध लोकसेवक बन सकता है या नहीं।

इसलिए इसका महत्व लिखित परीक्षा से अलग लेकिन उतना ही आवश्यक है।

7️⃣ BPSC दृष्टिकोण से - 

📌 BPSC इंटरव्यू में चयन ज्ञान से नहीं, बल्कि “Balance + Behaviour + Bureaucratic Aptitude” से होता है।

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