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BPSC MOCK Interview, Day -10

By - Gurumantra Civil Class

At - 2025-12-24 16:05:44

BPSC Mock Interview, Day -10

“धार्मिक स्वायत्तता बनाम प्रशासनिक सुधार : वक्फ संपत्तियों पर संवैधानिक विमर्श”

हाल के दिनों में संसद द्वारा लाए गए वक्फ अधिनियम संशोधन को लेकर व्यापक सार्वजनिक और राजनीतिक बहस देखने को मिली है।विपक्ष और अल्पसंख्यक समुदाय के एक वर्ग का यह मानना है कि संशोधन के माध्यम से धार्मिक संपत्तियों पर राज्य का नियंत्रण बढ़ेगा, जिससे मौलिक अधिकारों, विशेषकर धार्मिक स्वायत्तता और संपत्ति प्रबंधन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।वहीं सरकार का तर्क है कि पूर्ववर्ती व्यवस्था में दुरुपयोग, अवैध कब्जे, अपारदर्शी प्रबंधन और निजी लाभ के लिए वक्फ संपत्तियों के उपयोग जैसी समस्याएँ सामने आई थीं।सरकार के अनुसार संशोधन का उद्देश्य पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन सुनिश्चित करना है, न कि धार्मिक आस्थाओं में हस्तक्षेप करना।

संभावित इंटरव्यू प्रश्न एवं मॉडल उत्तर

प्रश्न 1.वक्फ संपत्ति क्या होती है और इसके प्रबंधन की संवेदनशीलता क्यों अधिक है?

मॉडल उत्तर:

वक्फ संपत्ति धार्मिक-परोपकारी उद्देश्य के लिए समर्पित होती है। इसकी संवेदनशीलता इसलिए अधिक है क्योंकि यह धार्मिक स्वतंत्रता, समुदायिक विश्वास और सार्वजनिक हित—तीनों से जुड़ी होती है।

प्रश्न 2.विपक्ष और अल्पसंख्यक वर्ग की मुख्य आपत्तियाँ क्या हैं?

मॉडल उत्तर:

उनकी प्रमुख आशंकाएँ हैं—

भूमि/संपत्ति अधिकारों पर संभावित प्रभाव,

धार्मिक मामलों में राज्य का अतिक्रमण,

निर्णय-प्रक्रिया में समुदाय की भागीदारी को लेकर चिंता।

ये चिंताएँ लोकतांत्रिक विमर्श में विचारणीय हैं।

प्रश्न 3.सरकार संशोधन को क्यों आवश्यक बता रही है?

मॉडल उत्तर:

सरकार का कहना है कि पूर्ववर्ती ढाँचे में दुरुपयोग, अवैध कब्जे, अपारदर्शी लेन-देन जैसी समस्याएँ थीं।

संशोधन का उद्देश्य पारदर्शिता, ऑडिट, रिकॉर्ड-कीपिंग और जवाबदेही बढ़ाना है ताकि वक्फ संपत्तियाँ अपने वास्तविक उद्देश्य के लिए उपयोग हों।

प्रश्न 4. (ट्रैप). क्या यह संशोधन मौलिक अधिकारों का हनन है?

सुरक्षित हाई-स्कोर उत्तर:-

मौलिक अधिकारों का आकलन अधिनियम के प्रावधानों और उनके क्रियान्वयन से होता है।

यदि संशोधन अनुच्छेद 25–26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए उचित प्रतिबंधों के भीतर प्रशासनिक सुधार करता है, तो इसे स्वतः हनन कहना उचित नहीं होगा। निर्णायक तत्व ड्यू-प्रोसेस और न्यायिक समीक्षा हैं।

प्रश्न 5.धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन में राज्य की भूमिका कहाँ तक उचित है?

मॉडल उत्तर:

राज्य धार्मिक आस्था में हस्तक्षेप नहीं करता, पर धर्मनिरपेक्ष प्रशासनिक पहलुओं—जैसे वित्तीय पारदर्शिता, संपत्ति प्रबंधन—में नियमन कर सकता है। यही संवैधानिक संतुलन है।

प्रश्न 6. (ट्रैप)क्या इस संशोधन से सरकार अल्पसंख्यकों की ज़मीन ‘कब्ज़ा’ कर लेगी?

सुरक्षित उत्तर:

‘कब्ज़ा’ जैसे निष्कर्ष इरादे पर आधारित होते हैं। प्रशासनिक दृष्टि से प्रश्न यह है कि प्रक्रिया पारदर्शी है या नहीं, अपील/न्यायिक उपाय उपलब्ध हैं या नहीं। इन्हीं से अधिकारों की सुरक्षा तय होती है।

प्रश्न 7.यदि वक्फ संपत्तियों का दुरुपयोग हो रहा था, तो सुधार कैसे हों?

हाई-स्कोर उत्तर:

सुधारों में डिजिटाइजेशन, नियमित ऑडिट, सार्वजनिक खुलासा, स्वतंत्र निगरानी और समुदाय की सहभागिता शामिल होनी चाहिए—ताकि उद्देश्य भी सुरक्षित रहे और विश्वास भी।

प्रश्न 8. (Ethics)लोकसेवक के रूप में आप दोनों पक्षों की आशंकाओं को कैसे संतुलित करेंगे?

मॉडल उत्तर:

मैं संवाद, तथ्य-आधारित संचार, और ग्रिवांस-रिड्रेसल पर ज़ोर दूँगा; साथ ही यह सुनिश्चित करूँगा कि धार्मिक स्वतंत्रता बनी रहे और प्रशासनिक सुधार निष्पक्ष रूप से लागू हों।

प्रश्न 9. (संवैधानिक)इस बहस में न्यायपालिका की भूमिका क्या हो सकती है?

मॉडल उत्तर:

न्यायपालिका संवैधानिक वैधता, प्रक्रियात्मक न्याय और मौलिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है—यह संतुलन बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

प्रश्न 10. (क्लोज़िंग)एक वाक्य में निष्कर्ष दीजिए।

प्रभावी उत्तर:

वक्फ संशोधन पर बहस का सार यह है कि पारदर्शी प्रशासन और धार्मिक स्वतंत्रता—दोनों को ड्यू-प्रोसेस के साथ संतुलित किया जाए।

🟡 इंटरव्यू के लिए “Golden Phrases”

Administrative reform, not religious interference

Due process & judicial safeguards

Transparency and accountability

Constitutional balance (Articles 25–26)

Community participation

🔴 आम TRAPS (बचें)

❌ किसी धर्म/समुदाय/नेता का नाम लेकर पक्ष लेना

❌ “कब्ज़ा/हनन” जैसे निर्णायक शब्द बिना शर्त

❌ भावनात्मक भाषा

SAFE लाइन:

“नीति का मूल्यांकन उसके प्रावधान, प्रक्रिया और प्रभाव से होना चाहिए।”

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