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BPSC 70th Mock Interview, Day -11

By - Gurumantra Civil Class

At - 2025-12-24 17:09:41

BPSC 70th MOCK Interview, Day -11

“वैश्विक रैंकिंग और राष्ट्रीय मीडिया : पक्षपात या चेतावनी?”

"Global rankings and national media: bias or warning?"

पृष्ठभूमि -

पिछले कुछ वर्षों में भारत की स्थिति अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता सूचकांकों में गिरती हुई दिखाई दी है, विशेषकर Reporters Without Borders द्वारा जारी World Press Freedom Index में।

इस गिरावट को लेकर एक वर्ग का मत है कि भारतीय मीडिया पर सरकारी प्रभाव, कॉरपोरेट स्वामित्व और आत्म-सेंसरशिप बढ़ी है, जिससे उसकी स्वतंत्रता और विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।

वहीं दूसरा वर्ग मानता है कि ये रैंकिंग पश्चिमी दृष्टिकोण और चयनित मानदंडों पर आधारित हैं तथा भारतीय मीडिया द्वारा राष्ट्रीय हित और आंतरिक सुरक्षा को प्राथमिकता देने के कारण भारत की रैंकिंग को नकारात्मक रूप से आँका जा रहा है।

यह बहस केवल रैंकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता, जिम्मेदार पत्रकारिता, राष्ट्रीय हित और वैश्विक आकलन की पद्धति जैसे मूलभूत प्रश्नों से जुड़ी है।

सिविल सेवा परीक्षा के संदर्भ में यह विषय संवैधानिक मूल्य, लोकतांत्रिक संस्थाएँ और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को संतुलित रूप से समझने की क्षमता को परखता है।

संभावित इंटरव्यू प्रश्न एवं मॉडल उत्तर

प्रश्न 1. भारतीय मीडिया की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग गिरने के क्या कारण बताए जाते हैं?

मॉडल उत्तर: रैंकिंग गिरने के कारणों में पत्रकारों की सुरक्षा, संपादकीय स्वतंत्रता, कानूनी दबाव, और मीडिया स्वामित्व की संरचना जैसे संकेतकों का हवाला दिया जाता है।

हालाँकि, किसी भी रैंकिंग को उसकी कार्यप्रणाली और संदर्भ में समझना आवश्यक है।

प्रश्न 2. (ट्रैप). क्या भारतीय मीडिया सरकार की कठपुतली बन चुकी है?

सुरक्षित हाई-स्कोर उत्तर:

ऐसा कहना एक सामान्यीकरण होगा।भारतीय मीडिया विविध स्वरूपों में मौजूद है—सरकार की आलोचना करने वाले माध्यम भी हैं और समर्थन करने वाले भी। मुद्दा यह है कि संस्थागत स्वतंत्रता और पेशेवर मानक कितने मजबूत हैं।

प्रश्न 3. दूसरा पक्ष कहता है कि विदेशी एजेंसियाँ भारत को बदनाम कर रही हैं—आप इसे कैसे देखते हैं?

मॉडल उत्तर:

अंतरराष्ट्रीय सूचकांक अपने स्वतंत्र मानदंडों पर काम करते हैं, लेकिन वे भी पूर्णतः निष्पक्ष या त्रुटिरहित नहीं होते।

इसलिए उन्हें न तो पूरी तरह खारिज किया जाना चाहिए, न ही अंतिम सत्य माना जाना चाहिए।

प्रश्न 4. क्या प्रेस स्वतंत्रता और राष्ट्रीय हित में टकराव हो सकता है?

हाई-स्कोर उत्तर:

स्वस्थ लोकतंत्र में प्रेस स्वतंत्रता और राष्ट्रीय हित परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि पूरक होते हैं।जिम्मेदार पत्रकारिता राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए भी सत्ता से प्रश्न पूछ सकती है।

प्रश्न 5. (संवैधानिक एंगल). भारत में प्रेस की स्वतंत्रता का संवैधानिक आधार क्या है?

मॉडल उत्तर:

प्रेस की स्वतंत्रता अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से निहित है,जो उचित प्रतिबंधों—जैसे सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा—के अधीन है।

प्रश्न 6. (ट्रैप). क्या रैंकिंग गिरने का अर्थ यह है कि लोकतंत्र कमजोर हो रहा है?

सुरक्षित उत्तर:

रैंकिंग एक संकेतक है, निष्कर्ष नहीं।

लोकतंत्र की मजबूती का मूल्यांकन संस्थाओं की कार्यक्षमता, न्यायिक स्वतंत्रता, नागरिक भागीदारी और मीडिया विविधता जैसे व्यापक मानकों से होना चाहिए।

प्रश्न 7. सरकार और मीडिया के संबंध कैसे होने चाहिए?

आदर्श उत्तर:

संबंध स्वतंत्र लेकिन जिम्मेदार होने चाहिए—

सरकार सूचना उपलब्ध कराए और मीडिया बिना दबाव के प्रश्न पूछे,

यही लोकतांत्रिक संतुलन है।

प्रश्न 8. (Ethics).एक लोकसेवक के रूप में आप मीडिया आलोचना को कैसे लेंगे?

मॉडल उत्तर:

एक लोकसेवक को मीडिया आलोचना को उत्तरदायित्व और आत्ममंथन के अवसर के रूप में लेना चाहिए, न कि शत्रुता के रूप में।

प्रश्न 9. भारतीय मीडिया की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए क्या कदम आवश्यक हैं?

हाई-स्कोर उत्तर:

पेशेवर आचार-संहिता का पालन,

संपादकीय स्वतंत्रता,

फैक्ट-चेकिंग,

और मीडिया साक्षरता—ये विश्वसनीयता बढ़ाने के प्रमुख उपाय हैं।

प्रश्न 10. (क्लोज़िंग). एक वाक्य में इस पूरे विवाद का सार बताइए।

प्रभावी उत्तर:

यह बहस सरकार बनाम मीडिया की नहीं, बल्कि स्वतंत्रता, जिम्मेदारी और विश्वसनीयता के संतुलन की है।

🟡 इंटरव्यू के लिए “Golden Phrases”

  1. Media freedom with responsibility
  2. Methodology of global indices
  3. Institutional independence
  4. Constitutional balance
  5. Plurality of voices

🔴 आम TRAPS (बचें)

❌ “मीडिया बिक चुकी है / विदेशी साज़िश है”

❌ किसी चैनल/पत्रकार का नाम लेना

❌ भावनात्मक या आरोपात्मक भाषा

SAFE लाइन:

“किसी भी सूचकांक को संदर्भ और पद्धति के साथ समझना चाहिए।”

 

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